ई-कॉमर्स में हैं रोजगार की असीम संभावनाएं

इंडियन ई-कॉमर्स इंडस्ट्री में रिवॉल्यूशन आया हुआ है। ई-बे और अमेजन की तरह फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, होमशॉप 18 जैसे दूसरे इंडियन स्टार्टअप्स सालाना करोड़ों का बिजनेस कर रहे हैं। स्टार्टअप्स भी अपने इनोवेशन के साथ ई-कॉमर्स का फायदा उठा रहे हैं। इससे न सिर्फ एंटरप्रेन्योशिप, बल्कि मार्केटिंग, फाइनेंस, लॉजिस्टिक, वेयरहाउस, ग्राफिक्स के क्षेत्र में जॉब के नए अवसर पैदा हुए हैं।

एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती मुंबई की धारावी में लेदर जैकेट बनाने वाले शख्स को आज अपना सामान बेचने के लिए बाजार में भटकने की जरूरत नहीं रह गई है। वह ग्राहकों तक अपने प्रोडक्ट्स ऑनलाइन पहुंचा सकता है। यह सिर्फ एक उदाहरण मात्र है, इंडिया में तेज गति से विकसित हुई ई-कॉमर्स इंडस्ट्री का। दरअसल, आज भारत में जिस तरह से इंटरनेट यूजर्स की संख्या बढ़ी है, करीब 2.5 करोड़ लोग ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे हैं। यही नहीं, क्राफ्ट्समैन और बिजनेसमैन देश-दुनिया के कोने-कोने में पेंटिंग, साड़ी, सूट, हैंडमेड क्राफ्ट्स पहुंचा रहे हैं। इससे कारीगरों को पहचान तो मिल रही है, साथ ही इस चेन से जुड़ने वाले तकनीकी और गैर-तकनीकी लोगों के लिए नए विकल्प भी खुल रहे हैं।

फिलहाल ई-कॉमर्स इंडस्ट्री करीब 12 अरब डॉलर की है, जिसके साल 2020 तक 75 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आइएएमएआइ) और आइएमआरबी की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ई-क़ॉमर्स करीब 34 फीसदी की दर से ग्रो कर रहा है। ई-बे और अमेजन जैसे ग्लोबल प्लेयर्स के बीच फ्लिपकार्ट, जबॉन्ग, स्नैपडील, होमशॉप18, मिंट्रा जैसी इंडियन ई-कॉमर्स कंपनियों ने सफलता की नई कहानी रची है। हाल ही में फ्लिपकार्ट ने ऑनलाइन फैशन में सिक्का जमाने के लिए करीब 370 मिलियन डॉलर में मिंट्रा डॉट कॉम का टेक ओवर किया है।

इंडियन इकोनॉमी में ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी फिलहाल एक फीसदी है। नैस्कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 तक देश के जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर करीब 4 फीसदी होने की संभावना है। देश की नई सरकार जिस तरह से डिजिटल इकोनॉमी पर जोर दे रही है और ई-कॉमर्स में विदेशी पूंजी निवेश यानी एफडीआई की बात भी चल रही है, उससे इसका भविष्य चमकदार नजर आ रहा है।